शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

Media par Ankush aur Kashmir

मीडिया पर अंकुश और कश्मीर
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कश्मीर, एक ज्वलंत मुद्दा है... जो भारत और पाकिस्तान के अविर्भाव के साथ ही 70 साल से जल रहा है | कभी अपने विलय को लेकर तो कभी अपने आज़ादी को लेकर तो कभी विभिन्न आतंकी समूहों द्वारा वहां के युवाओं को बरगलाकर हाथ में बम और बन्दुक थमाने को लेकर | अब पैलेट गन , कर्फ्यू, आतंकी को शहीद बनाकर, पत्थरबाज़ी, बेमतलब फतवा जारी कर कश्मीर लगातार सुर्ख़ियों में है |
मीडिया पर अंकुश, इस ज्वाला को और भड़का रहा हैं | आज इन्टरनेट , टीवी, समाचारपत्र सब बंद है जिससे पूरा कश्मीर पूरी दुनिया से कटा हुआ है | खबर तो छन छन के आ ही जाती है पर मुख्य मीडिया के अंकुश से बहुत सी जमीनी हकीक़त से हम सब अनजान रह जाते हैं |
कश्मीर के जलने के बहुत से कारण हो सकते है लेकिन मीडिया के प्रभाव से यह जगह भी अछूता नहीं रहा है | पढ़े लिखे कश्मीरी युवा वर्ग मुख्य मीडिया के साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचारों को खुले तौर पर रख कर अपने परेशानियों और जरूरतों को रख पाते हैं | जिससे दुनिया के सभी हिस्सों के लोग रूबरू होते हैं | चूँकि, कश्मीर भारत के अखंडता से जुड़ा है इसलिए ऐसा ऐतिहात बरता जा रहा है | लेकिन कहीं न कहीं यह अंकुश अभिव्यक्ति के आज़ादी का हनन है | हमारा तरीका बर्बर और निरंकुश नहीं होना चाहिए | सरकार और उनके प्रतिनिधियों को कश्मीर के मूल समस्या और ज़मीनी हकीक़त को समझकर लोंगों के अन्दर एक विश्वास पैदा करने की जरुरत है, और समस्त अलगाववादी नेताओं को नेस्तनाबूंद करने की जरुरत है ,क्योंकी जब तक अलगावादी नेता रहेंगें तब तक कश्मीर की जनता इसी तरह दोहरे विचारधारा की आग में जलती रहेगी |

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