बुधवार, 14 सितंबर 2016

सम्बन्ध और अविश्वास

सम्बन्ध और अविश्वास
स्रोत : गूगल
सम्बन्ध – सम बंध , समान रूप से दिल के एक धागे में बंध जाना होता है सम्बन्ध | एक बेटे या बेटी का अपने मां –पिता से , एक बहन का भाई से , एक दोस्त का दोस्त से | जहाँ देखेंगे वहीँ है सम्बन्ध .... बिखरा पड़ा है , कहीं हँसता तो कहीं रोता तो कहीं घुटता और सिसकता |
अविश्वास – यह हिन्दी व्याकरण से निकला हुआ ऐसा शब्द है जो सभी सम्बन्ध ख़राब करता है यह सकारात्मक छाप नहीं छोड़ता , कहीं भी अविश्वास सिर्फ भ्रम , शंका, और दुराव ही पैदा करता है |
फिर भी सम्बन्ध और अविश्वास में चोली दामन का साथ है | जब सम्बन्ध में व्यापार होने लगता है , जब स्वार्थ हावी हो जाता है , जब व्यक्तिगत हित की बातें और घमंड को पानी दिया जाने लगता है , जब किसी दुसरे के कहने से एक दुसरे की दृष्टि शंकालु हो जाती है तब ...... तब सम्बन्ध चीखना चाहता है लेकिन चीख नहीं पाता , रोना चाहता है पर आंशु ही नहीं होते , बहुत दूर तक नंगे पैर भागना चाहता है लेकिन रास्ता ही नहीं होता | भरोसा टूटता है , दिल टूटता है, भावनाएं आहत होती हैं | अविश्वास मुस्कुराता है , सम्बन्ध घिघियाता है पर उसे महसूस करने वाला तो शुन्य हो जाता है फिर कौन उस सम्बन्ध को और उस अविश्वास को समझने वाला होता है ???? सिवाय खुद के ....
समझ सम्बन्ध बनाता है , पर जब समझ ही कहीं सिमट जाये , कोई मोड़ दे , कोई भरोसे को ही तोड़ दे तो फिर , कैसा और कहाँ का सम्बन्ध ??
बोली के आधार पर , जिले के आधार पर , प्रान्त के आधार पर , देश के आधार पर कितने समाज में बंट के भी एक हैं सब,  फिर भी सम्बन्ध नहीं क्योंकी अविश्वास इतना गहरा है की कभी सम्बन्ध होने ही नहीं देगा, बनने ही नहीं देगा |  
फिर भी आइसोलेशन के शिकार है लोग , भुलभुलैया में भटक रहे लोग , खोज रहे लोग ... इंसान नहीं , ‘गुलाम’|
जिस पर भरोसा न सही अविश्वास के साथ ही रखें और जब मन भगा के अपने घमंड की तुष्टि कर लें और दुनिया को बताते फिरे की हमने पुरे मानव जाति पर एहसान कर दिया और खुद ही मुस्कुरा लें , खुद ही गा लें | लोंगों से ताली बजवा लें | खुद ही दार्शनिक बन जायें , खुद ही ज्ञान बाँट दें ...उन्ही गुलामों को जो मेरे लिए काम कर के अपनी रोज़ी रोटी चलाते हैं | हम दुनिया के बादशाह बन जाते है और मान लेते हैं की हमने ही धरती बनायीं, आकाश और हवा के साथ पानी बनायीं | हम ही ब्रह्म हैं , हमसे ही दुनिया चल रही है ....

-विन्ध्या सिंह 

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