राष्ट्रीय
खेल दिवस और प्रतिभाएं
फोटो: गूगल
दुनिया भर में ‘हॉकी
के जादूगर’ के नाम से मशहूर खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जी के जयंती के रूप में हर साल 29
अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया
जाता है | उनके प्रति भारत की जनता का सम्मान है |
हम आज के दिन राष्ट्रीय खेल नीति के बारे में ध्यान दिलाना
चाहते हैं – आपको याद होगा जब आपके बचपन में बहुत सी ऐसी प्रतिभाएं थीं , वही
राजू जो बहुत तेज़ दौड़ता था , अरे ! साधना,
जो सबसे ज्यादा ऊँचा खुदती थी , आपको याद नहीं जियाउल अली जो कबड्डी में सांसें
कितने लम्बी देर तक रोक लेता था या वो नुपुर निषाद जो सबसे लम्बा भाला फेंकती थी | ऐसे लोग किसी भी खेल स्पर्धा में
स्कूल या कालेज स्तर पर पदक जीतते थे | गाँव हो या शहर , हर जगह ऐसी प्रतिभाएं
मिलती रहीं है जो बदस्तूर अब तक जारी है बिना किसी सहयोग के | कुछ प्रतिभाएं घर के
अभिभावक के जागरूकता के कारण आगे बढ़ कर साक्षी ,सिन्धु ,जीतू और करमाकर बन जाती
हैं तो कोई फटेहाल जिंदगी को सिलने में लग जाती हैं | ऐसी है हमारे देश की खेल
नीति , जो 70 सालों में गाँव तो छोड़िये , शहर तक नहीं पहुँच पायी |
क्यों पदक की आश लिए
हैं हम सभी ?? जब उन प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका ही नहीं दे रहे | तरह तरह के
खेल स्पर्धा के लिए समिति बनी हुई है और उस समिति में खेल से जुड़े लोग बस ढूंढने
से ही मिलेंगे | मिलेंगे तो किसी नेता, किसी बिजनस मैन के रिश्तेदार या खुद नेता
ही घाघ बन के वर्षो से खेल को आगे बढ़ा रहें है, तथा मीडिया में हल्ला मचा के पदक
की उम्मीद लगाये बैठे हैं | हो भी क्यों न ! कम से कम पुरे ओलंपिक सत्र के दौरान
टीवी पर दिखने का मौका जो मिलता है उनको |
कितनी दोहरी सोच है ,
खेल भावना जगती भी है तो बस ओलंपिक में पदक लाने के लिए | उसके पीछे की व्यवस्था
और सहयोग को हम सोचते तक नहीं | एक खिलाड़ी जो बिना किसी सहयोग के , बहुत सी
उपेक्षाओं को झेलते हुए भारत के अपेक्षाओं पर खड़ा उतरने की कोशिश करता है और हम
टीवी ,न्यूज़ पेपर देख और पढ़ के बस कोसते और ताली बजाते हैं |
कब जागेगी सरकार और
कब जागेंगे लोग , बहुत से साक्षी, सिन्धु , करमाकर, जीतू , बाबर गाँव –गिरांव और
शहरों में अपने देश के लिए पदक जितना चाहते हैं , लेकिन उनके सामने जिंदगी जीने की
जद्दोजहत भी है जो उनके खेल पर भरी पड़ जाती है |
अब सरकार के साथ ही
आम जनमानस को भी इसके विषय में सोचना होगा , तभी हम सब देश के नाम को पदक तालिका
में सबसे ऊपर देख पाएंगे |

किसी भी खिलाड़ी की महानता को नापने का सबसे बड़ा पैमाना है कि उसके साथ कितनी किंवदंतियाँ जुड़ी हैं. उस हिसाब से तो मेजर ध्यानचंद का कोई जवाब नहीं है. हॉलैंड में लोगों ने उनकी हॉकी स्टिक तुड़वा कर देखी कि कहीं उसमें चुंबक तो नहीं लगा है.
जवाब देंहटाएं#जन्मदिन #ढेरों #शुभकामनाएं #मेजर #ध्यानचंद #हाकी #जादूगर
जर्मनी को हराने के बाद , हिटलर भी मेजर ध्यानचंद का सम्मान करने लगा | बस राष्ट्रीय खेल नीति गाँव तक पहुँच जाये फिर ओपी ग्रामीण पत्रकरिता का एक अपना अनुभव होगा | बहुत से मेडल मिलेंगे भारत को | :)
हटाएंSports is one of the most important aspect of life. Sports directly means activeness and fitness, but youth and kids today are more indulged in Computers and Mobile... I have written a Blog about History of Sports Day, please do check...
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