स्किल इंडिया और बेरोजगारी
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स्किल इंडिया का नारा
आज हर जगह सुनने को मिल जाता है | स्किल का विकास हो न हो लेकिन नेताओं की फोटो
पेपर में जरुर छप जाती है , शायद उन्हें बस इतने से ही मतलब है | गाँव की भाषा में
इसे कोरम पूरा करना कहते हैं , मतलब किसी तरह जल्दी निपटाओ भाई और झूठे
आकड़ें प्रस्तुत कर के खुद की पीठ थपथपा लो | हो गया स्किल इंडिया का वादा पूरा |
70 साल हो गए आज़ादी
के , बेतहाशा जनसँख्या भी बढ़ ही रही है , उसी
के साथ- साथ बेरोज़गारी भी दिन दुगुनी रात
चौगुनी बढ़ती ही जा रही है | इसमें स्किल इंडिया का नारा तो अँधेरे में एक रोशनी
जैसा है | क्योंकी आज किसी भी क्षेत्र में नौकरी खोजने जाईये तो अप्रशिक्षित
लोंगों की जगह प्रशिक्षित लोंगों की ज्यादा मांग है | इसलिए स्किल इंडिया, एक अवसर
के तौर पर देखा जा सकता है | खैर , सरकार
तो भरसक यह कोशिश कर रही है की स्किल इंडिया के माध्यम से बेरोजगारों को प्रशिक्षण
दे कर उन्हें उचित रोजगार मुहैया काराया जाये | इस मिशन से ख़ास तौर पर गरीबों और
उन छात्रों को फायदा होगा जो आर्थिक स्थिति की वजह से तकनिकी पढ़ाई नहीं कर पाते और
मजबूरन अकुशल कामगार की तरह कार्य करना पड़ता है |
स्किल
डेवलपमेंट के मामले में दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत बहुत पीछे हैं। चीन
में 45 फीसदी, अमेरिका में 56
फीसदी, जर्मनी में 74 फीसदी,
जापान में 80 फीसदी और दक्षिण कोरिया में 96
फीसदी लोग किसी न किसी कौशल में प्रशिक्षित हैं, जबकि भारत में यह
संख्या 4 फीसदी से भी कम है। पहली बार उन युवाओं के बारे में
सोचा जा रहा है जिनकी औपचारिक शिक्षा किन्हीं वजहों से छूट गई थी | अगर
स्किल इंडिया का यह विचार सफल होता है तो भारत एक बार फिर सम्पूर्ण विश्व में एक
अलग मुकाम बनाने में सफल होगा |

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