आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने यह साबित कर दिया की देश के
न्यायतंत्र में देर भले ही है पर अंधेर नहीं है |
निर्भया केस में कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को जस का तस रख कर ,
दोषियों के मौत की सजा को बरकरार रखा है |
यह निर्णय एक नज़ीर है और आने वाले समय में कोई भी ऐसी गन्दी और क्रूर
हरकत करने के पहले १००० बार सोचेगा |
जिस तरह कोर्ट ने इसे बर्बर कृत्य बताते हुए इसे क्रूरता की सुनामी
के रूप में परिभाषित किया उससे इस केस की गंभीरता प्रदर्शित होती है |
निर्भया के माँ पिता के संग भारत के प्रत्येक संवेदनशील लोंगों को
यह फैसला बहुत ही राहत देने वाला है |
निर्भया के पिता ने कहा भी – “ हम सुप्रीमकोर्ट के निर्णय से बहुत
खुश है , देर सही पर मुकम्मल निर्णय है |”
निःसंदेह यह निर्णय न्यायतंत्र में एक विश्वास जगाता है और इस बात पर
विराम लगाता है की न्याय व्यवस्था बहुत ही लचर हो चुकी है |

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