शुक्रवार, 5 मई 2017

बर्बरता के लिए कोई माफ़ी नहीं - सुप्रीमकोर्ट

आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने यह साबित कर दिया की देश के न्यायतंत्र में देर भले ही है पर अंधेर नहीं है |
निर्भया केस में कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को जस का तस रख कर , दोषियों के मौत की सजा को बरकरार रखा है |
यह निर्णय एक नज़ीर है और आने वाले समय में कोई भी ऐसी गन्दी और क्रूर हरकत करने के पहले १००० बार सोचेगा |
जिस तरह कोर्ट ने इसे बर्बर कृत्य बताते हुए इसे क्रूरता की सुनामी के रूप में परिभाषित किया उससे इस केस की गंभीरता प्रदर्शित होती है |
निर्भया के माँ पिता के संग भारत के प्रत्येक संवेदनशील लोंगों को यह फैसला बहुत ही राहत देने वाला है |
निर्भया के पिता ने कहा भी – “ हम सुप्रीमकोर्ट के निर्णय से बहुत खुश है , देर सही पर मुकम्मल निर्णय है |”

निःसंदेह यह निर्णय न्यायतंत्र में एक विश्वास जगाता है और इस बात पर विराम लगाता है की न्याय व्यवस्था बहुत ही लचर हो चुकी है |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पक्ष और विपक्ष की राजनीति में भूल गए आम जनता का दर्द

  आजकल राजनीतिक माहौल से आप सभी परिचित होंगे। संसदीय सत्र की कार्यवाही और बहस देख लें तो आपको हंसी भी आएगी और खींझ भी होगा कि हमने इस लोकतन्...