एक छोटे से शहर के हाईस्कूल में
पढ़ने वाला लड़का जब रोज साइकिल से स्कूल और कोचिंग पढ़ने जाता है तो एक-एक पैडल के
साथ वह अपने सपनों को जीने की और आगे बढ़ने का दम लगाता है | कुछ ऐसे सपने जो वह
अपनी पारिवारिक स्थिति, अपने आस-पास और दोस्तों को देखते हुए, किसी आदर्श
व्यक्तित्व या अन्य कहीं से प्रेरणा लेकर बुनता है और फिर अपने अंदर ही अंदर उसे पूरा
करने के लिए जूझता है | कुछ ऐसे ही सुशांत भी थे | उन्हीं युवाओं के बीच से निकला
एक युवा जो अपने सपनों को जीना चाहता था और वह कदम-दर-कदम आगे भी बढ़ रहा था | फिर
अचानक वह दुनियां छोड़ कर चला गया | कैसे गया यह ठीक-ठीक कोई भी नहीं बता सकता ....
चूँकि सुशांत हम लोगों जैसे युवाओं
में से ही थे तो उनका संघर्ष, उनके काम, उनकी सोच, उनका व्यवहार अपने उम्र वर्ग के
युवाओं जैसा ही रहा होगा | आज युवाओं में इसीलिए आक्रोश भी है की वह ऐसे कैसे जा
सकते है जैसी स्टोरी चलायी जा रही है | जब छोटे शहर से निकला युवा अपने सपनों को
लेकर दिल्ली, मुंबई, बंगलौर जैसे बड़े शहरों में आता है तो वह अपने जीने और व्यवहार
का तरीका नहीं बदलता | वह सीखता है की उसे किस तरह अपनी मेहनत से उन सपनों को पूरा
करना है जिनके लिए वह अपना भरा पूरा परिवार, बचपन के यार और खुबसूरत यादों को छोड़
कर आ गया है |
Photo: Googleसुशांत किसी के आदर्श हों न हों
लेकिन उनके सपने देश का प्रत्येक युवा अपने तरीके से देखता है | कौन युवा सफल नहीं
होना चाहता ? कौन युवा अपना और अपने परिवार का नाम ऊँचा नहीं उठाना चाहता? कौन
युवा अपने सपनों के लिए जीना नहीं चाहता ? सबके दिल दिमाग में सफल होना और आगे
बढ़ना ही होता है | सब लोग खुश रहना चाहते है, अपनी जरूरतों को पूरा करना चाहते है,
अपने सपनों को जीना चाहते है |अब करोड़ों युवाओं में कुछ लोग अपने
सपनों को पूरा कर पाते है तो अधिकांश लोग नहीं कर पाते है लेकिन खुद को उस व्यक्ति
से रिलेट कर लेते हैं जैसे लोग फिल्म देखते देखते अपनी खुद की कहानी जोड़ लेते हैं
|
सुशांत का इस तरह से जाना भला कोई
भी कैसे पचा सकता है जब वह कहानी हर युवा की हो ? कोई कैसे किसी भी स्टोरी पर
भरोसा कर ले ? दिल नहीं मान सकता और दिमाग तर्क करना नहीं छोड़ सकता ...
वह जहाँ भी रहें खुश रहें लेकिन उनका
जाने का वक़्त नहीं था | वह अभी आने वाली पीढ़ियों के प्रेरणा बनते, वह अपने संघर्ष
की कहानियों से प्रेरित कर न जाने कितने युवाओं को सपने बुनने और जीने की कला सिखाते
, न जाने कितने युवाओं को उस असफलता के अंधकार से निकालते जिनके सपने पुरे नहीं हो
पाते |

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