सिन्धु, साक्षी है बेटियों के प्रतिकार का
पूरा देश खुश है ,मदमस्त है .... देश की बेटियों ने तिरंगे का सम्मान बढ़ाया है | देशवासियों को नाज़ करने का एक मौका दिया है | हो भी क्यों न , 125 करोड़ जनता आज बेटियों की वजह से खुश है |
क्या यह ख़ुशी सिर्फ
इसलिए है की ओलम्पिक में भारत को मेडल मिला ??? या इसलिए की यह काम बेटियों ने
किया ???
इस प्रश्न का उत्तर
शायद न मिल सके क्योंकी हम सच से हमेशा भागने वालों में से है , हाँ यह जरुर है की
जिस गुरुर में सामाजिक ताना - बाना चल रहा है , उस पर एक अघात पहुंचा है क्योंकी
मेडल सिर्फ लड़कियां ही लायी हैं |
क्या आपको दुःख नहीं
होता जब रोज़ सुबह अख़बार उठाते ही बेटियों के साथ हो रही ज्यादती , छेड़छाड़ ,
बलात्कार ,गैंगरेप की घटनाओं के ख़बरों को पढ़ते हैं ?? कितना नाज़ है बेटियों पर ,
कितना अभिमान है बेटियों पर ?? सिर्फ इसलिए की देश का सर झुकने से बच गया, ओलम्पिक
में मेडल आ गया | लेकिन देश में ही हो रही उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार और
पुरुषवादी मानसिकता तथा उपभोग की वस्तु समझकर जिस तरह व्यवहार हो रहा है ,क्या यह
देश का सर नहीं झुका रहा ?
एक तरफ ‘बेटी
बचाओ,बेटी पढाओ’ का नारा देते हुए हम समाज को मजबूत और जागरूक कर रहे तो दूसरी तरफ उनको उनके लड़की
होने का एहसास भी करा रहे हैं , वह भी पुरुषवादी मानसिकता के साथ |
एक बार उनके होने के
एहसास को समझें , सिर्फ एक बार उनके मजबूती को समझे जो किसी भी परिस्थिति को संभाल
लेती हैं तो सिर्फ एक सिन्धु ,साक्षी
,दीपा , बाबर ,साईना, सानिया, फोगाट और न
जाने कितने नाम हैं , को देश का नाम ऊँचा करते हुए देखेंगे |
महिलाएं बहुत मजबूत
होती हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी
धैर्य रखती हैं | किसी देश का विकास तभी हो सकता है जब उस देश में महिलाओं का
सम्मान हो और उनकी शिक्षा तथा विकास का उचित प्रबंध हो | क्योंकी आगे आने वाली
पीढ़ी के निर्माण में एक मां की भूमिका प्रथम शिक्षक के रूप में होती है | महिलाओं
,बेटियों का सम्मान करें और उनको सामान अवसर देने का प्रयास करें |
-
विन्ध्या सिंह