शनिवार, 27 अगस्त 2016

राजनितिक पार्टियों के मीडिया प्रभारी और मीडिया की निष्पक्षता

राजनितिक पार्टियों के मीडिया प्रभारी और मीडिया की निष्पक्षता
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राजनितिक पार्टियों के संगठन में, मीडिया प्रभारी पद से आप सभी अवगत होंगे | इनके कार्य से भी आप अंजान नहीं होंगे , इनका कार्य है मीडिया प्रबंधन | मीडिया के लोंगों को मैनेज करना और उसी अनुरूप अपने पार्टी से जुड़े सामाचार को मैनेज करना |
अब सवाल यह उठता है की क्या मीडिया निष्पक्ष रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है ? तब जब इसे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में परिभाषित किया गया है |
इस प्रश्न के उत्तर को समझा जा सकता है | आज प्रत्येक मीडिया समूह (प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक, वेब ) आर्थिक आधार पर अपने कंटेंट और समाचार का चुनाव करते हैं | इनके आर्थिक समृद्धि का प्रमुख स्रोत विज्ञापन है | अब पहले की पत्रकारिता नहीं रही जब लोग सामाजिक परिवर्तन के लिए समाचार पत्र निकालते थे और सामाचार लिखते थे |
प्रत्येक मीडिया समूह किसी न किसी पार्टी के अपरोक्ष हस्तक्षेप से या फिर उस पार्टी के नेताओं के सहयोग से चल रहा है ( यह जाँच का विषय हो सकता है ) | और जो ऐसे किसी तरीके से जुड़ाव नहीं रखता वह अपने आर्थिक नीतियों के हिसाब से सत्ता के अनुरूप खुद को ढाल लेता है | फिर हम मीडिया की निष्पक्षता को कैसे सही ठहरा सकते हैं ?
जब किसी पार्टी के किसी नेता द्वारा कानून का उलंघन होता है या फिर कोई अपराध या गलतियां होती है तब यह पार्टी के मीडिया प्रभारी डैमेज कण्ट्रोल में लग जाते है और मीडिया समूह को मैनेज करने में जुट जाते है | अक्सर सत्ताधारी पार्टी का दबाव ज्यादा रहता है क्योंकी अपने छवि के साथ -साथ कुर्सी भी बचानी होती है | अपने विचारधारा वाले पत्रकारों को पार्टी देना उनके गलत या सही कार्यों को कराना ,यही इनका मीडिया प्रबंधन हैं | अपने पार्टी के इमेज को बनाने के लिए यह मीडिया का भरपूर उपयोग करते हैं , और मीडिया यह भूल जाती है की क्या सही है और क्या गलत क्योंकी उनके समाचार का आधार आर्थिक है |
वास्तव में मीडिया की यह भूमिका कहीं न कहीं भारतीय जनमानस के विचार को , सामाजिक गतिविधियों और विकास को तवज्जों नहीं दे रहा , अगर दे भी रहा तो वह सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज़ की तरह आता है और फिर गायब भी हो जाता है | मीडिया की भूमिका , विभिन्न राजनितिक पार्टियों के मीडिया प्रभारी तय करने लगे हैं | अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मीडिया अपनी विश्वसनीयता खो देगी और लोग अन्य माध्यम के द्वारा अपने विचारों के अभिव्यक्ति में विश्वास करने लगेंगे | मीडिया को पार्टी के मीडिया प्रभारियों के प्रभाव से बचाना होगा अन्यथा लोकतंत्र का यह चौथा स्तम्भ डगमगा कर धराशायी हो जायेगा |

शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

Media par Ankush aur Kashmir

मीडिया पर अंकुश और कश्मीर
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कश्मीर, एक ज्वलंत मुद्दा है... जो भारत और पाकिस्तान के अविर्भाव के साथ ही 70 साल से जल रहा है | कभी अपने विलय को लेकर तो कभी अपने आज़ादी को लेकर तो कभी विभिन्न आतंकी समूहों द्वारा वहां के युवाओं को बरगलाकर हाथ में बम और बन्दुक थमाने को लेकर | अब पैलेट गन , कर्फ्यू, आतंकी को शहीद बनाकर, पत्थरबाज़ी, बेमतलब फतवा जारी कर कश्मीर लगातार सुर्ख़ियों में है |
मीडिया पर अंकुश, इस ज्वाला को और भड़का रहा हैं | आज इन्टरनेट , टीवी, समाचारपत्र सब बंद है जिससे पूरा कश्मीर पूरी दुनिया से कटा हुआ है | खबर तो छन छन के आ ही जाती है पर मुख्य मीडिया के अंकुश से बहुत सी जमीनी हकीक़त से हम सब अनजान रह जाते हैं |
कश्मीर के जलने के बहुत से कारण हो सकते है लेकिन मीडिया के प्रभाव से यह जगह भी अछूता नहीं रहा है | पढ़े लिखे कश्मीरी युवा वर्ग मुख्य मीडिया के साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचारों को खुले तौर पर रख कर अपने परेशानियों और जरूरतों को रख पाते हैं | जिससे दुनिया के सभी हिस्सों के लोग रूबरू होते हैं | चूँकि, कश्मीर भारत के अखंडता से जुड़ा है इसलिए ऐसा ऐतिहात बरता जा रहा है | लेकिन कहीं न कहीं यह अंकुश अभिव्यक्ति के आज़ादी का हनन है | हमारा तरीका बर्बर और निरंकुश नहीं होना चाहिए | सरकार और उनके प्रतिनिधियों को कश्मीर के मूल समस्या और ज़मीनी हकीक़त को समझकर लोंगों के अन्दर एक विश्वास पैदा करने की जरुरत है, और समस्त अलगाववादी नेताओं को नेस्तनाबूंद करने की जरुरत है ,क्योंकी जब तक अलगावादी नेता रहेंगें तब तक कश्मीर की जनता इसी तरह दोहरे विचारधारा की आग में जलती रहेगी |

मंगलवार, 23 अगस्त 2016

World Wada-Paaw Day

विश्व वड़ा-पाव दिवस पर 144 फीट लम्बे वड़ा-पाव का साक्षी बना गुडगाँव

गुडगाँव 23 अगस्त , वैसे तो वडा-पाव मुंबई (महाराष्ट्र) के लाइफ फ़ूड के रूप में जाना जाता है लेकिन सबसे लम्बे वडा पाव बनाने के लिए गुडगाँव का नाम दर्ज होने जा रहा है | विश्व वडा पाव दिवस के अवसर पर आज गुडगाँव का ‘नुक्कड़वाला’ रेस्टोरेंट, 144 फीट लम्बा वड़ा –पाव बनाकर लिम्का बुक की दावेदारी पेश किया | 200 किग्रा आलू और 200 किग्रा ब्रेड के साथ 25 लोंगों की टीम ने इसे 3 घंटे में तैयार की, जिसकी अगुआई मुख्य शेफ़ अजय शूद ने किया | नुक्कड़वाला , वाटिका ग्रुप का एक फ़ूड चेन रेस्टोरेंट है | वड़ा-पाव बनाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हुई जिसे लिम्का बुक के पर्यवेक्षक को सौपा गया | परिक्षण के बाद इसे लिम्का बुक में दुनिया का सबसे लम्बा वड़ा- पाव गुडगाँव के नाम दर्ज किया जायेगा | इसके लिए पहले से ही रजिस्ट्रेशन हो गया है | 500 से अधिक लोगों ने सेक्टर -49  स्थित वाटिका बिजनस पार्क में आकर इसे देखा और इसका स्वाद का लुफ़्त उठाया , जो लोंगों के लिए फ्री रहा |

वाटिका ग्रुप के एमडी गौरव भल्ला ने बताया कि- “मैं यह सोचता हूँ की वडा-पाव जैसे स्ट्रीट फ़ूड को हम हल्के में लेते हैं | हम यह चाहते थे की लोग विश्व वडा-पाव दिवस के बारे में जाने, इसलिए यह निर्णय लिया की हम अपने अनूठे ‘नुक्कड़वाला’ तरीके से इसे मनाएंगे |  यही कारण है की हम इस अवसर पर दुनिया का सबसे लम्बा वडा-पाव बनाकर सेलिब्रेट कर रहें हैं |”

सोमवार, 22 अगस्त 2016

Beti Bachao, Beti Padhao , Beti Ko Khiladi Banao

सिन्धु, साक्षी है बेटियों के प्रतिकार का


पूरा देश खुश है ,मदमस्त है .... देश की बेटियों ने तिरंगे का सम्मान बढ़ाया है | देशवासियों को नाज़ करने का एक मौका दिया है | हो  भी क्यों न , 125 करोड़ जनता आज बेटियों की वजह से खुश है |
क्या यह ख़ुशी सिर्फ इसलिए है की ओलम्पिक में भारत को मेडल मिला ??? या इसलिए की यह काम बेटियों ने किया ???
इस प्रश्न का उत्तर शायद न मिल सके क्योंकी हम सच से हमेशा भागने वालों में से है , हाँ यह जरुर है की जिस गुरुर में सामाजिक ताना - बाना चल रहा है , उस पर एक अघात पहुंचा है क्योंकी मेडल सिर्फ लड़कियां ही लायी हैं |
क्या आपको दुःख नहीं होता जब रोज़ सुबह अख़बार उठाते ही बेटियों के साथ हो रही ज्यादती , छेड़छाड़ , बलात्कार ,गैंगरेप की घटनाओं के ख़बरों को पढ़ते हैं ?? कितना नाज़ है बेटियों पर , कितना अभिमान है बेटियों पर ?? सिर्फ इसलिए की देश का सर झुकने से बच गया, ओलम्पिक में मेडल आ गया | लेकिन देश में ही हो रही उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार और पुरुषवादी मानसिकता तथा उपभोग की वस्तु समझकर जिस तरह व्यवहार हो रहा है ,क्या यह देश का सर नहीं झुका रहा ?
एक तरफ ‘बेटी बचाओ,बेटी पढाओ’ का नारा देते हुए हम समाज को मजबूत  और जागरूक कर रहे तो दूसरी तरफ उनको उनके लड़की होने का एहसास भी करा रहे हैं , वह भी पुरुषवादी मानसिकता के साथ |
एक बार उनके होने के एहसास को समझें , सिर्फ एक बार उनके मजबूती को समझे जो किसी भी परिस्थिति को संभाल लेती हैं  तो सिर्फ एक सिन्धु ,साक्षी ,दीपा , बाबर ,साईना, सानिया, फोगाट और  न जाने कितने नाम हैं , को देश का नाम ऊँचा करते हुए देखेंगे |
महिलाएं बहुत मजबूत होती हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी  धैर्य रखती हैं | किसी देश का विकास तभी हो सकता है जब उस देश में महिलाओं का सम्मान हो और उनकी शिक्षा तथा विकास का उचित प्रबंध हो | क्योंकी आगे आने वाली पीढ़ी के निर्माण में एक मां की भूमिका प्रथम शिक्षक के रूप में होती है | महिलाओं ,बेटियों का सम्मान करें और उनको सामान अवसर देने का प्रयास करें |


-          विन्ध्या सिंह 

रविवार, 18 दिसंबर 2011

Doori..... ek khalipan :(

Doori........ ek aisa word jo hame bechain kar deta hai, agar aisa word aata hai to dil me ek betabi n dimag me ek uljhan ho jati hai.....kaisi doori,kisase doori, and doori kyu.....!!!!
eska ehsas tab hota hai....jab aap vastav me door hote ho....aur jaan nahi pate ki aap sabse jyada miss kya kar rahe aur her baar usi baat k liye....distrb rahte ho...... fir bhi usko bayan nahi kar pate...... apne sabdo me......kyuki usako bataya nahi ja sakta....... fir bhi wo ek roop me dil ke bahar aake apne zazbat ko batane ki ek kosis karta hai.....aur wo medium hai......."jhagra" 

hm jhagra ke madhyam se....apne us khalipan us bechaini ko batane ki kosis karte hai...kyuki usake baad aisa koe medium hi nahi...pyar se kahenge to ek ehsas paida hoga ki hm jaldi waha pahuche jaha se aisi bimari hai........bt her baat k sath aapka kaam bhi hota hai....n usi kaam k bich aap us khalipan ko mahsoos karte ho.......  jo aap us persnlty se aspect karte ho jisake wajeh se.....aisa kuch hota hai....aur wo hota hai..... "CARE"..... her ek woqt..... her ek pal...... jo nahi milata .....sayad jhagra usi ki den hai...... samajh k bhi samajh me nahi aati...... wo esliye kyuki uski jaroorat hamesa aur her ek pal me hoti hai.........

kuch logo ka manana hai ki door jane ke baad adami bhoolne lagta hai...... sayad ye baat sahi bhi hai...kyuki jab aap nahi rahte to aapki image dimag me nahi rahti...... aur tab dimag aapke liye kaam nahi karta......wo esliye kyuki dil se sochte hi nahi....... jab soch hoti hai to image hota hai....aur jab image hota hai...tab miss karta hai ensaan.... nahi to wo khoya rahta hai...aapne aas pass ki duniya me........ aur wohi woqt doori ka ehsaas karata hai....... hm under se nahi jante bt sayad yehi sahi lagta hai.....ki  ensaan jab door ho to bhoolane ki bimari jaldi lagti hai jab aap usake baare me thoda sa bhi nahi soch rahe tab....... nahi to fir ek baat aur bhi sahi hai......... doori pyar ka ehsas karati hai....... aur wo ensaan ese achche se samajh sakta hai.....jo dil se sochta hai.....usake baare me jisake liye wo bechain hai............. ya fir poori duniya hi khali lagane lagti hai....... kyuki wohi ensaan nahi sochta jisake liye aap her chij karne ke liye paresaan hote ho ....yaha tak ki aap ke jaan ki bhi koe kimat nahi us ehsas ke aage................................................:(

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

Relation...... ehsas,care,and choti choti batein.....:)

Relation.... bahut achcha aur pyara word hai jo....kaan me jate hi apnepan ka ehsas dilata hai......thoda sukun thoda aram.... mind kuch pal k liye relax ho jata hai......ye soch ke ki relation hai..... .... kuch relation me log jyada intrested hote hai aur kuch me kam ya bilkul nahi...... wo sab priority ke hisab se hota hai..... per kya hm us relation k adhikar ki baat karte hai.....us adhikar ki jis base pe relation develop hota hai..... ??????

bahut kuch sahi lagta hai jb sab kuch sahi hota hai.....per jb relation me rahne wala dusra ensan relation ko tavzo nahi deta..... fir us emotion ka sirf aur sirf dum ghutata hai....aur wo relation fir kaam k aur naam k liye rah jata hai....wo excitement aur dedication  dhire dhire kam hone lagta hai......kyuki dusra ensaan us relation ko generally leta hai .....jo yeh batata hai ki ......... ab us relation me koe sukun nahi.......bas hai.. kyu hai...kyuki use hona hai bas.......... chahe aise chahe vaise................................. jab dimag alone hota hai aur bilkul shant to fir us khalipan ka ehsas hota hai aur sayad use bharne k liye hm lakh kosis karte hai....bas ek kosis hi rah jati hai...kyuki kuch chijo ko pura karna bahut asan nahi hota.......... aur jab ye baat bahut kareebi ho.... relation ne hi es duniya ko ek sutra me bandha .......jise sansar ki sangya di gaye........ aisa sansar jaha human behavior ki bheed hai....her ensan alag hai uska sochane ka tarika ya fir her kaam karne ka tarika....fir bhi mind ya dil......... juda hai....us personality se ..................chahe wo pa ho, ma ho, bahen ho, ya fir biwi ya fir koe bhi...................... fir bhi apanepan ka ehsas aur sukun hota hai....lagta hai hm safe hai..... bt..........sayad sukun nahi......na shanti hai........ kyuki bhagna aur bhagte rahna jindagi ka naam ho gaya hai..... ego satisfaction important hai....... chahe relation jis taraf jaye..... bhulte ja rahe hm log........ ki relation ko sjana padta hai...sawarna padta hai............ kyuki relation bahut hi emotional word hai......jab tutata hai to awaz nahi karta......bas aansu ke samndar baha deta hai................................. bachta kuch nahi.....rahta kuch nahi........bas.......ensaan apne aapko describe nahi kar pata................ relation ek ehsas hai.....care hai...., aur her choti choti baton ka ek gul-dasta hai.............. sanjidagi se jiyo aur khush raho.......
aapka :
Vindhya

पक्ष और विपक्ष की राजनीति में भूल गए आम जनता का दर्द

  आजकल राजनीतिक माहौल से आप सभी परिचित होंगे। संसदीय सत्र की कार्यवाही और बहस देख लें तो आपको हंसी भी आएगी और खींझ भी होगा कि हमने इस लोकतन्...