फोटो : गूगल
सिंगुर , शायद आपने नाम सुना हो !
एक समय ऐसा था जब सभी समाचार पत्र , न्यूज़ चैनेल इस नाम से अपनी टीआरपी बढ़ाने में लगे हुए थे | लेकिन आज कोई सिंगुर की हालत पर बात नहीं करता | पश्चिम बंगाल का यह जगह कभी टाटा नैनो की लखटकिया परियोजना के लिए पुरे देश में चर्चा का विषय रहा | साथ ही यह किसानों की जमीन से जुड़ा मुद्दा भी रहा , कुछ किसानों ने खुद अपनी जमीन इस परियोजना के लिए दे दी, तो कुछ सरकार ने जबरदस्ती ले लिया | आन्दोलन हुए, राजनीति हुयी और फिर वाम सरकार को कई दशकों का शासन छोड़ना पड़ा | ममता बनर्जी , इस आन्दोलन के सहारे सत्ता में आयीं, सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़ी गयी और फिर किसानों के पक्ष में आदेश भी आया ,तत्पश्चात नैनों प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा जो गुजरात चला गया | जमीन वापस किसानों को दी जाने लगी और साथ ही प्रभावित किसानों को प्रति महीने कुछ रूपये और सस्ते अनाज भी | ..... जिस जमीन पर यह परियोजना बन रही थी उसके बहुत सारे हिस्से पर कार्य चल रहा था जो लगभग आधा के करीब पहुँच गया था, जिस जमीन पर लहलहाती खेती हुआ करती थी वहां बस कंक्रीट के ढांचे और खम्भे खड़े दिखाई देने लगे | सड़कें पक्की बन गयी और ड्रेनेज सिस्टम भी बन गया .... मतलब पूरा आधार तैयार हो गया | फिर ........
किसानों को जमीन वापस दे दी गयी , अब किसान ‘न घर का रहा न घाट का’ | उस मजबूत बने कंक्रीट के आधार पर वह दुबारा खेती नहीं कर सकता और उसे हटाने में मानव श्रम काफी नहीं हैं तथा सरकार उसे हटाने के लिए कोई प्रयास भी नहीं कर रही है यदि मनरेगा के तहत उसे हटाने की कवायद चल भी रही है तो वह कितने वर्षों में हटेगा यह आप खुद ही अनुमान लगा सकते हैं | क्या होगा सिंगुर के किसानों की हालत ? आप सोच के ही दुखी हो जायेंगे , वह तो भुक्तभोगी हैं | जिन किसानों की आजीविका खेती से चलती थी वह आज मजदुर बन गए , कुछ ने उम्मीद लगायी होगी की फैक्ट्री चलेगी तो रोजगार के कुछ न कुछ साधन बन ही जायेंगे , बन ही जाते | लेकिन वह भी नहीं हुआ ... अब उस क्षेत्र की जनता को वहीँ के नेताओं ने उस हालत में ला दिया जिसे वह कभी सपने में भी नहीं सोचे होंगें | ऐसे अदूरदर्शी फैसले से लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है इसे न तो सरकार जानना चाहती है और न ही अधिकारी | देश बोलने से नहीं करने से बदलेगा .... पर किसी को क्या फर्क पड़ता है जब सिंगुर के किसान का लड़का अपनी पढ़ाई छोड़ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में मजदूरी करे, रिक्शा चलाये , पकौड़े बेचे , और एक ऐसी जिंदगी जिए जिसे वह कभी जीना नहीं चाहता रहा हो | एक ऐसे परेशानी से गुजरे जिसे स्थानीय राजनेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए खड़ी किये हों | भारत की अधिकांश जनता अभी भी कृषि पर जीवनयापन कर रही है लेकिन आप उसे वहां भी जीने नहीं देना चाहते | एक किसान होना उस भगवान होने जैसा है जो हमें अन्न देता है लेकिन आप उसके ही खेत को छीन कर उसे ही भूमिहीन बना दिए , मजदुर बना मज़बूरी की जिंदगी जीने के लिए बेबस कर दिए | यदि इस तरह किसी के जीवन को बर्बाद कर विकास करना चाहते हैं तो वह दिन दूर नहीं जब पुरे देश में असंतोष होगा और लोग जीने के लिए एक दुसरे को मारते फिरेंगे | किसी विशेष क्षेत्र में अपराध बढ़ने का यह भी एक कारण होता है | हम किसी फैक्ट्री या परियोजना का विरोध नहीं करते , हाँ ! बस वह वहां की जनता के हित के लिए होना चाहिए ..... भविष्य में कोई सिंगुर न बने इस उम्मीद के साथ , जय हिन्द !
Reference : www.thewirehindi.com
Reference : www.thewirehindi.com

Very well written. You master the art of playing with words and presenting it in a most appealing manner.
जवाब देंहटाएंOsm sir
जवाब देंहटाएंThe article portrays true picture of our present India: very well versed and presented
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