उत्तर प्रदेश : बहुमत का झुकाव
यूपी विधानसभा का
चुनाव अगले साल फ़रवरी-मार्च तक होने की संभावना है | बोर्ड की परीक्षा को देखते
हुए ,पहले या बाद में चुनाव हो सकते हैं | चूँकि चुनाव है और सभी पार्टियाँ अपने
अभियान को धार देने में जी-जान से जुटी हुई हैं और साथ ही मौजूदा सरकार अपने पांच
वर्ष के कार्य को प्रचारित –प्रसारित भी कर रही है | भाजपा मोदी के सहारे , सपा
अपने किये गए कार्य के सहारे, बसपा विरोध के सहारे,तो कांग्रेस खाट पंचायत के
सहारे और अन्य पार्टियाँ अपने अपने गोलबंदी के सहारे , तरह तरह के अभियान चला रखीं
हैं | सभी अभियान का लक्ष्य यूपी में बहुमत पाना और सरकार बनाना है | इन सबके बाद
बात आती है जनता की, आखिर जनता क्या चाहती है | चूँकि संविधान में जनता जनार्दन को
यह सोचने का अधिकार तो दिया ही गया है की वह किसको अपना सरकार और भाग्य विधाता
चुनेगी | (अपने अनुभव द्वारा, उत्तर प्रदेश के लोंगों से मिलने और गाँव गाँव घुमने
के बाद) जहाँ तक लोंगों की बात करें तो लोग मौजूदा सरकार के कार्य से तो थोड़ा बहुत
खुश हैं, ख़ासकर युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से | लेकिन लोग दुबारा सत्ता नहीं
सौपना चाहते ( इसके बहुत से वजह हैं , जिन पर यहाँ चर्चा करना ठीक नहीं) | दूसरी तरफ
विपक्ष और विरोधी पार्टी बसपा, जिनके शासन-प्रशासन और पारदर्शिता को अब लोग दुबारा
याद करने लगे है ( भ्रष्टाचार को छोड़ के) और साथ ही दलित वर्ग का समर्थन भी है |
इनकी बातें ज्यादा हो रहीं है और सरकार बनाने के दौड़ में फ़िलहाल आगे हैं | भाजपा
का कोई चुनावी चेहरा नहीं है और बिहार के बाद एक बार फिर पूरा दारोमदार मोदी जी पर
है , साथ ही पार्टी में टिकट को लेकर अंदरूनी कलह की संभावना से इंकार भी नहीं
किया जा सकता | अपने-अपने क्षेत्र के महारथी टिकट बंटवारे को लेकर कलह कर सकते है
साथ ही मुख्यमंत्री कौन होगा यह भी तय नहीं है | जातिगत और क्षेत्रीय आधार पर समाज
को साधने की कोशिश तो हो रही है लेकिन जमीनी स्तर पर हिंदुत्व कार्ड को छोड़कर बाकि
ऐसा कुछ नहीं है जिससे जनता का रुझान भाजपा की तरफ हो | फिर भी पाकिस्तान के विरोध
और सर्जिकल स्ट्राइक के पापुलरिटी इनको फायदा पहुंचाएगी और सरकार बनाने की दौड़ में
यह भी सबसे आगे हैं | कांग्रेस के राहुल गाँधी खाट पंचायत कर कर के कार्यकर्ताओं
में कुछ जान तो फूंके है लेकिन यह संजीवनी प्रदेश में सीट दिला पायेगी इसका भरोसा
नहीं है | एक बात हो सकता है की अगर कुछ सीटें इनको मिली तो यह किंगमेकर की अवस्था
में आ सकती है | यह पार्टी सपा या बसपा किसी से मिलकर भाजपा को रोकने की कोशिश
भरपूर करेगी |
जनता अब बहुत समझदार
हो गयी है तथा देश और प्रदेश के चुनाव के महत्व को जानती है | बिहार चुनाव इसका
उदहारण है लेकिन साथ ही साथ असम का चुनाव भी बिता है तो सटीक रूप से कुछ कहा नहीं
जा सकता | जनता की बातों और रुझान से बसपा अभी आगे है परन्तु भाजपा भी अपने
संगठन, प्रचार और मोदी के कार्य के साथ विकास को मुख्य मुद्दा बनाते हुए , मैदान
में ललकार रही है | इन बातों के बाद एक लाइन याद आ गया –
“उम्मीदों
का प्रदेश, उत्तर प्रदेश”





