चीन
की चाल और भारत की नज़र
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जब आप स्कूल में पढ़ते रहे होंगे तो आपके साथ
कुछ ऐसे साथी भी पढ़ते रहे होंगे जो आपसे भी मीठा मीठा बात करते होंगे और आप जिनसे
बात नहीं करना चाहते हैं उनसे भी वैसे ही बात करते रहे होंगे | दरअसल उनका मकसद
यही होता है की दोनों को साधे रखें |
बिल्कुल उपरोक्त कथन की तरह चीन भी , भारत और पाकिस्तान
के साथ वही कर रहा | इधर उसको बड़ा बाज़ार चाहिए उधर उसको भारत पर अपनी पकड़ बनाने के
लिए पाकिस्तान का साथ चाहिए क्योंकी भारत का मुख्य सहयोगी अमेरिका बना हुआ है |
चीन को अमेरिका से परेशानी है इसलिए सब कुछ बहुत ही व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया
जा रहा चीन द्वारा | अभी हाल में जब भारत ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल ऑपरेशन किया
तो पाकिस्तान भाग कर चीन के पास गया और चीन ने ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी
रोक दिया | यह सारा वाकया इसलिए हुआ क्योंकी कुछ दिन पहले भारत ने पाकिस्तान से
जुड़े सिन्धु जल समझौते की समीक्षा करने की बात कही थी |
आज भारत के अन्य पड़ोसी देश नेपाल, बांग्ला देश
आदि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के सुर में बात कर रहे जो सकारात्मक रुख है | इधर
भारत भी विश्वसमुदाय को अपने पाले में करने के लिए और पाकिस्तान को सभी विश्व
संगठन से अलग थलग करने की मुहीम चला रखी है | यह जरुरी भी है क्योंकी धीरे धीरे
सभी देशों को यह पता चल ही गया है की पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री है | आतंकवादी
देश घोषित करने के लिए नैतिक दबाव बनाना जरुरी है |
भारत की
संप्रभुता और अखंडता से कोई भी देश, व्यक्ति या संस्था खिलवाड़ नहीं कर सकती | आज
भारत के पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जिसकी इच्छाशक्ति बहुत मजबूत है और वह देश को
एक नई दिशा देने में लगे हुए हैं | बहुत कम समय में ही भारत की पहचान पुरे विश्व
में एक शक्ति के रूप में हो रही है , अमेरिका भी इस बात को समझ रहा है इसलिए
दोस्ती के सम्बन्ध को दोनों देश के राजनयिक मजबूत करने में लगे हैं | भारत किसी भी
देश का अहित नहीं चाहता और सभी देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है और भूख,
गरीबी , पर्यावरण जैसी गंभीर समस्याओं से लड़ना चाहता है | भारत सत्य, अहिंसा का
देश है , यहाँ विभिन्न संस्कृति और विभिन्न समुदाय के लोग रहते हैं और भारत को एक
लोकतान्त्रिक देश के रूप में सुसज्जित करते हैं |




